Free Online Ayurvedic Doctor Consulting. Contact No - 8624087060

Trivang Bhasma

Rs. 300




Description

त्रिवंग भस्म हर्बल और धातु सामग्री से बनी एक आयुर्वेदिक औषधि है। यह एक आयुर्वेदिक धातु युक्त निर्माण है जिसमें वंग (टिन), नाग (सीसा) और यशद (जस्ता) की बराबर मात्रा की भस्म होती है।

त्रिवंग भस्म को नपुंसकता के लिए, स्वप्नदोष, मधुमेह, बार बार पेशाब आने पर, आवर्ती गर्भपात, लयूकोरिया, और बांझपन के लिए दिया जाता है। इसका मुख्य प्रभाव नसों, वृषण, गर्भाशय, अंडाशय और मूत्राशय पर दिखाई देता है। इसलिए, इसको इन अंगों में होने वाली बीमारियों के लिए प्रयोग किया जाता है। यह दवा प्रजनन और मूत्र प्रणाली के लिए टॉनिक है। त्रिवंग भस्म में एंटीसेप्टिक गुण है और यह विशेष रूप से मूत्र और जनन अंग पर काम करती है।

त्रिवंग भस्म के घटक एवं निर्माण विधित्रिवंग का अर्थ है तीन धातु तत्व अर्थात (टिन), नाग (सीसा) और यशद (जस्ता) इन तीनों धातुओं को बराबर मात्रा में लेकर, एलो वेरा और हल्दी के साथ मिलाकर गरम करने से त्रिवंग भस्म बनती है।

घटक

वंग (टिन) भस्म: टिन आयुर्वेद में वंग के रूप में जाना जाता है। वंग भस्म को मधुमेह, प्रमेह, मेदोरोग, यकृत रोग, खांसी, सांस की बीमारियों, नपुंसकता, नसों की कमजोरी आदि में प्रयोग किया जाता है। इसका सेवन भूख, पाचन, और स्वास्थ्य को बेहतर बनाता है। पित्त और कफ की ख़राबी के कारण होने वाले रोगों में उपयोगी है।

नाग (सीसा) भस्म: लेड को सीसा या आयुर्वेद में नाग के रूप में जाना जाता है। नाग भस्म को मधुमेह, प्रमेह, आंख, पाचन संबंधी विकार, मूत्र विकार, जिगर और तिल्ली आदि रोगों में दिया जाता है। यह भूख बढ़ाता है। यह मूत्र पथ विकारों, नपुंसकता, नसों की कमजोरी और वात और कफ की वजह से होने वाले रोगों में लाभदायक है।

यशद (जस्ता) भस्म: जिंक यशद के रूप में जाना जाता है। यशद भस्म, मधुमेह, प्रमेह, पीलिया, सांस की बीमारियों, खांसी, घाव, पार्किंसंस आदि में दिया जाता है, यह शक्ति, क्षमता, बुद्धि बढ़ाता है और बिगड़े कफ और पित्त के कारण होने वाली बीमारियों के उपचार में प्रयोग किया जाता है।

भांग चूर्ण:  भांग के पौधे का पाउडर

अफीम चूर्ण: अफीम पोस्ते का चूर्ण

एलो वेरा: एलो वेरा का रस

विधि

शुद्ध नाग, जस्ते और वंग को एक समान मात्रा में मिलाकर धीमी आंच में लोहे के बर्तन में पकाया जाता है। भांग और अफीम पोस्ते का चूर्ण काम मात्रा में डालकर लोहे की कलछी से चलाया जाता है। इसको लगातार करते रहें, कुछ समय बाद मिश्रण जल कर राख बन जाएगा। इसके पश्चात बर्तन को सीलबंद कर दें और उच्च तापमान पर 15 घंटे के लिए गरम करें। मिश्रण जब गहरा लाल हो जाए तो उसको ठंडा करें। फिर इसको छान लें और एलो वेरा रस के इसका मर्दन करें। इस क्रिया को सात बार करने से पीले रंग की त्रिवंग भस्म का निर्माण होता है।

त्रिवंग भस्म के औषधीय गुण

त्रिवंग भस्म पुरुषों में एंड्रोजेनिक और कामोद्दीपक कार्रवाई करती है। यह अंडाशय से डिंबक्षरण और अंडे निकलने के लिए प्रोत्साहित करती है। यह गर्भाशय को शक्ति प्रदान करती है, और आरोपण के लिए अंतर्गर्भाशयकला सक्षम बनाती है। इस प्रकार, यह महिलाओं में अस्पष्टीकृत बांझपन होने पर मदद करती है।

पुरुषों की समस्याएं
  • नपुंसकता
  • स्वप्नदोष

महिलाओं की समस्याएँ

  • अस्पष्टीकृत बांझपन
  • डिंबक्षरण
  • बार-बार गर्भपात या गर्भावस्था के नुकसान
  • महिला अंगों के अल्प विकास
  • प्रदर
  • अविकसित स्तन

मूत्र विकार

  • अन्नसारमेह (मूत्र में प्रोटीन हानि)
  • पेशाब में शर्करा (मूत्र में शर्करा)
  • मूत्र असंयम
  • लगातार पेशाब आना

इसे मधुमेह में भी प्रयोग किया जाता है।

त्रिवंग भस्म के लाभ और उपयोग

त्रिवंग भस्म एक प्रकार से शरीर के लिए शक्तिदायक औषधि है। यह संक्रामक रोगों के विरुद्ध शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ा देती है। इसके सेवन से हड्डियों और मांसपेशियों को ताकत मिलती है जिससे शरीर को शक्ति मिलती है। यह औषधि मधुमेह, बीस प्रकार के प्रमेह और प्रमेह सम्बंधित परेशानियों में लाभ देती है। पुरुषों में शुक्राणु और नसों से सम्बंधित रोगों में और महिलाओं में गर्भ और अंडाणु से सम्बंधित रोगों में लाभ देती है। इसके अलावा यह औषधि मूत्र संबंधी विकारों में भी दी जाती है।

यहाँ हम इसके कुछ महत्त्वपूर्ण उपयोगों के बारे में चर्चा करेंगे।

स्वप्नदोष (रात्रिकालीन उत्सर्जन)

त्रिवंग भस्म रात्रि उत्सर्जन (स्वप्नदोष) की आवृत्ति को कम कर देती है। यह इस तरह के मामले में इसको आंवले के मुरब्बे और इसबगोल की भूसी के साथ प्रयोग किया जाता है।

उच्छायी शिथिलता (नपुंसकता)

त्रिवंग भस्म कामोद्दीपक क्रिया करती है, जो उत्थान बनाए रखने में मदद करती है और शिश्न ऊतकों को ताकत देती है। उत्थान शिथिलता के उपचार में इसे गाय के घी और दूध के साथ लेना चाहिए। इसके अतिरिक्त, अश्वगंधा, कौंच पाक, मूसली पाक आदि भी इस्तेमाल किया जाना चाहिए।

यह भस्म वीर्य का बढ़ाती है और शुक्र को गाढ़ा करती है। शिथिल हुई नसों के कारण वीर्यस्राव होने को भी इसका सेवन ठीक करता है।

महिलाओं में बांझपन

महिलाओं में बांझपन गर्भाशय और अंडाशय के अल्प विकास या अंतर्गर्भाशयकला के कारण निषेचित अंडे को प्रत्यारोपण करने में असमर्थता के कारण हो सकता है। ऐसे मामलों में, त्रिवंग भस्म को अश्वगंधा चूर्ण और दूधयस्कृति के फायदे, औषधीय प्रयोग, मात्रा एवं दुष्प्रभावशोकारिष्ट के लाभ, औषधीय प्रयोग, मात्रा एवं दुष्प्रभाव