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Daruhaldi Akkha

Rs. 300




Description

दारुहरिद्रा के पत्र दृढ, चर्मवत, आयताकार, कंटकीय दांतों से युक्त अर्थात कांटेदार पत्र होते है,  | इनकी लम्बाई 1 से 3 इंच होती है | इसकी पुष्पमंजरी 2 &ndash 3 इंच लम्बी संयुक्त होती है जो सफ़ेद या पीले रंग की होती है | पुष्प हमेशां गुच्छों में लगते है और साल के अप्रेल &ndash जून महीने में खिलते है | इसके फल अंडाकार नील बैंगनी रंग के होते है जिन्हें हकीम आदि &ldquoझरिष्क&rdquo नाम से पुकारते है | जून महीने के बाद इसके फल लगते है | दारुहरिद्रा में रस क्रिया द्वारा रसांजन &ldquoरसौंत&rdquo प्राप्त किया जाता है जो एक प्रकार का सत्व होता है |

दारुहल्दी के स्वास्थ्य लाभ और फायदे 

इसका प्रयोग आयुर्वेद में कई रोगों के निदार्नाथ किया जाता है | यह शोथहर (सुजन दूर करना), वेदनास्थापन (दर्द), व्रणरोपण (घाव भरना), दीपन &ndash पाचन, पित्त को हटाने वाला, ज्वर नाशक (बुखार), रक्त को शुद्ध करने एवं कफ दूर करना आदि गुणों से युक्त होता है | इन सभी रोगों में इसके अच्छे परिणाम मिलते है |

  •  बुखार होने पर इसकी जड़ से बनाये गए काढ़े को इस्तेमाल करने से जल्द ही बुखार से छुटकारा मिलता
  • दालचीनी के साथ दारू हल्दी को मिलाकर चूर्ण बना ले | इस चूर्ण को नित्य सुबह &ndash शाम 1 चम्मच की मात्रा में शहद के साथ उपयोग करने से महिलाओं की सफ़ेद पानी की समस्या दूर हो जाती है |
  • अगर शरीर में कहीं सुजन होतो इसकी जड़ को पानी में घिसकर इसका लेप प्रभावित अंग पर करने से सुजन दूर हो जाती है एवं साथ ही दर्द अगर होतो उसमे भी लाभ मिलता है | इस प्रयोग को आप घाव या फोड़े &ndash फुंसियों पर भी कर सकते है , इससे जल्दी ही घाब भर जाता है |
  • इसका लेप आँखों पर करने से आँखों की जलन दूर होती है |
  • दारुहल्दी के फलों में विभिन्न प्रकार के पूरक तत्व होते है | यह वृक्ष जहाँ पाया जाता है वहां के लोग इनका इस्तेमाल करते है , जिससे उन्हें विभिन्न प्रकार के पौषक तत्वों के सेवन से विभिन स्वास्थ्य लाभ प्राप्त होते है |
  • पीलिया रोग में भी इसका उपयोग लाभ देता है | इसके फांट को शहद के साथ गृहण लाभ देता है |
  • मधुमेह रोग में इसका क्वाथ बना कर प्रयोग करने से काफी लाभ मिलता है |
  • इससे बनाये जाने वाले रसांजन से विभिन्न रोगों में लाभ मिलता है |