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Description

विदारीकंद (Vidarikand) का प्रयोग निम्नलिखित बीमारियों, स्थितियों और लक्षणों के उपचार, नियंत्रण, रोकथाम और सुधार के लिए किया जाता है:
बाल समस्याओं
त्वचा रोगों
नेत्र संक्रमण
एसिडिटी
रक्ताल्पता
पोस्ट वितरण गर्भाशय दर्द
मासिक धर्म संबंधी विकार
रजोनिवृत्ति सिंड्रोम
गर्भाशय कमजोरी
रक्तस्राव विकार
अत्यधिक गर्मी
आयुर्वेद के द्वारा यौन रोग, यौन दुर्बलता, आंशिक व नपुंसकता का सही रूप से इलाज किया जा सकता है।
 
आयुर्वेद के अंदर मुख्य चिकित्सा ग्रंथ चरक संहिता, सुश्रुत संहिता में संभोग शक्ति को बढ़ाने जैसे कार्य करने के अंदर आने वाला यौन विकार व यौन दुर्बलता से संबंध रखने वाले सभी कारण तथा अलग-अलग परिस्थितियों में अलग-अलग तरह की औषधि से इलाज करना बताया गया है। यदि यौन दुर्बलता का पूरे भरोसे व शांति के साथ इसका उपचार किया जाए तो इसका सम्पूर्ण इलाज किया जा सकता है।
*शीघ्रपतन की समस्या होने पर 50 ग्राम गोखरू, 50 ग्राम ताल मखाना, 50 ग्राम सतावर, 50 ग्राम विदारीकन्द, 50 ग्राम अश्वगंधा, 50 ग्राम विधारा, 50 ग्राम सफ़ेद चिरमिटी, 100 ग्राम मिश्री को मिलाकार बारीक़ चूर्ण बना लें. इस चूर्ण को 4-5 की मात्रा में सुबह नाश्ते और रात्रि भोजन के बाद लगातार 40 दिनों तक लेने से शीघ्रपतन की समस्या में लाभ मिलता है
*विदारीकन्द का चूर्ण 2.5 ग्राम को गूलर के 15 मिली रस में मिलाकर सुबह शाम दूध से लेने पर दीर्घ आयु पुरुष भी मैथुन में सक्षम हो जाते हैं !
*विदारीकन्द का चूर्ण 2.5 ग्राम को गूलर के 15 मिली रस में मिलाकर सुबह शाम दूध से लेने पर अधिक उम्र वाले पुरुष भी मैथुन में सक्षम हो जाते हैं !*लगभग 6 ग्राम की मात्रा में विदारीकन्द के चूर्ण को लगभग 10 ग्राम गाय के घी में और लगभग 20 ग्राम शहद में मिलाकर गाय के दूध के साथ लेने से शरीर में ताकत आती है। इसका सेवन लगातार 40 दिनों तक करना चाहिए।

सुन्दरि विदारिकायाः सम्यक् स्वरसेन भवति चूर्णम।
सर्पिः क्षौद्रसमेतं लीढ्वा रसिको दशांगना समयेत्।।


अर्थात विदारीकन्द को कूट पीस कर खूब बारीक चूर्ण करके इसे विदारीकन्द के ही रस में भिगो कर सुखा लें इस चूर्ण की एक चम्मच मात्रा में आधा चम्मच देशी घी और घी से तीन गुना यानि कि ढेड़ चम्मच शहद मिला कर चाट लें और ऊपर से एक गिलास मीठा कुनकुना दूध पी लें।इस प्रकार लगातार 60 दिन सेवन करने के उपरान्त यौन दौर्बल्य व नपुंसकता अवस्य ही मिट जाएगी।जो लोग शादी शुदा हैं उनके लिए यह योग नव यौवन प्रदान करने वाला है। यह बहुत ही सस्ता बनाने में सरल व शरीर को मजबूत व टिकाऊ बना देने वाला योग है ।