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Babul Phali Powder

Rs. 700




Description

एक आयु के बाद शरीर के जोड़ों में लुब्रीकेन्टस एवं केल्शियम बनना कम हो जातां है. जिससे कारन जोडो का दर्द, गैप, केल्शियम की कमी, वगैरा प्रोब्लेम्स सामने आती है, जिसके चलते आधुनिक चिकित्सा आपको जोइन्ट रिप्लेस करने की सलाह देते है. तो यह प्रयोग आपको ऐसी नौबत से बचा सकता है.

बबूल से घुटनों की घरेलु दवा तैयार करने की विधि.

प्रयोग इस प्रकार करनां है *बबूल* के पेड़ पर जो *फली (फल)* आती है उसको तोडकर लेकर आये, अगर आपको ये सिटी मे नही मिल रहे तो किसी भी गांव जाएँ, वहां जितने चाहिये उतने मिल जायेगें, उसको बीज सहित ही सुखाकर पाउडर बना ले. बस दवा तैयार है.

अब आइये जाने इसके सेवन की विधि.

सुबह 1 चम्मच की मात्रा मे गुनगुने पानी से खाने के एक घंटे के बाद, 2-3 महीने लगातार सेवन करने से आपके घुटने का दर्द बिल्कुल सही हो सकता है. और आपको घुटने बदलने की नौबत नहीं आएगी.

हम हमेशा आपके लिए नयी नयी जानकारी ले कर आते हैं. तांकि आपका स्वास्थ्य बना रहे. और आप दवाओं के नाम पर होने वाले धोखे से बचे रहें. आयुर्वेद जीवन शैली है इसको अपनाएँ.

इसके साथ में आप अगर नीचे दालचीनी वाला प्रयोग करेंगे तो आपको रिजल्ट बहुत जल्दी मिलेंगे.

बबूल की कच्ची फली सुखा लें और मिश्री मिलाकर खायें इससे वीर्य रोग में लाभ होता है...

*10 ग्राम बबूल की मुलायम पत्तियों को 10 ग्राम मिश्री के
साथ पीसकर पानी के साथ लेने से वीर्य-रोगों में लाभ
होता है। अगर बबूल की हरी पत्तियां न हो तो 30 ग्राम
सूखी पत्ती भी ले सकते हैं।

*कीकर (बबूल) की 100 ग्राम गोंद भून लें इसे पीसकर इसमें
50 ग्राम पिसी हुई असगंध मिला दें। इसे 5-5 ग्राम सुबह-
शाम हल्के गर्म दूध से लेने से वीर्य के रोग में लाभ होता है।

*50 ग्राम कीकर के पत्तों को छाया में सुखाकर और पीसकर
तथा छानकर इसमें 100 ग्राम चीनी मिलाकर 10-10 ग्राम
सुबह-शाम दूध के साथ लेने से वीर्य के रोग में लाभ मिलता है।

*बबूल की फलियों को छाया में सुखा लें और इसमें बराबर
की मात्रा मे मिश्री मिलाकर पीस लेते हैं। इसे एक चम्मच
की मात्रा में सुबह-शाम नियमित रूप से पानी के साथ सेवन से
करने से वीर्य गाढ़ा होता है और सभी वीर्य के रोग दूर हो जाते हैं।

*बबूल के गोंद को घी में तलकर उसका पाक बनाकर खाने से
पुरुषों का वीर्य बढ़ता है और प्रसूत काल स्त्रियों को खिलाने
से उनकी शक्ति भी बढ़ती है।

*बबूल का पंचांग लेकर पीस लें और आधी मात्रा में
मिश्री मिलाकर एक चम्मच की मात्रा में सुबह-शाम नियमित
सेवन करने से कुछ ही समय में वीर्य रोग में लाभ मिलता है।